सरकार ने एनआरसी को लेकर लोगों का भ्रम को स्पष्ट किया । बता दे कि गृह मंत्रालय ने कहा है कि किसी भारतीय नागरिकों को इसकी वजह से कोई भी असुविधा नहीं होगी नागरिकता के लिए भारत में जन्म पत्र से जुड़ा कोई भी प्रमाण पत्र मान्य होगा ।

जन्म प्रमाण पत्र के लिए कई दस्तावेज मान्य होंगे जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी व्यक्ति भारतीय नागरिक अनावश्यक रूप से परेशान ना हो, जिसके पास दस्तावेज नहीं होंगे उनके लिए सक्षम अधिकारी उन्हें गवाह पेश करने की सहमति दे सकते हैं।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया है कि जिन का जन्म भारत में 1987 से पहले हुआ या जिसके माता-पिता की जन्म 1987 से पहले की है कानून के मुताबिक भारतीय नागरिक हैं और नागरिकता कानून 2019 देशव्यापी एनआरसी के कारण चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

बता दे कि नागरिक कानून संशोधन के अनुसार असम में रहने वाले लोगों को छोड़कर देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले ऐसे लोग जिनके माता-पिता भारतीय नागरिक हैं या पहले की अवैध प्रवासी नहीं है उन्हें भी भारतीय नागरिक ही माना जाएगा ।असम के मामले में भारतीय नागरिक होने के लिए 1971 को आधार वर्ष बनाया गया है।

ये है नियम :
- 2004 में किए गए संशोधन के अनुसार जिनका जन्म भारत में 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद लेकिन 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है वह भारतीय नागरिक हैं।
- जिनका जन्म भारत में 1 जुलाई को 1987 को या उसके बाद लेकिन 3 दिसंबर 2004 से पहले हुआ है वह उनके जन्म के समय माता या पिता भारतीय नागरिक है तो वह वास्तविक भारतीय नागरिक होंगे।
- भारत में 3 दिसंबर 2004 को या उसके बाद हुआ हो तो माता-पिता दोनों अगर भारत के नागरिक है या उनमें से कोई एक भारत का नागरिक है तो वह भारत का नागरिक हैं।