पेटीएम ई वॉलेट ने अपना मिनी एप स्टोर किया लॉन्च# क्या है मिनी एप स्टोर जाने विस्तार से(National current affairs)

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हाल ही में पेटीएम ई वॉलेट ने अपना खुद का मिनी एप्प स्टोर लॉन्च किया है। जो भारत में बहुत ही प्रसिद्ध हो चुका है जब हमारे पास नगद राशि मौजूद नहीं रहती है तो हम इस ऐप के जरिए कहीं और किसी जगह पर भी रकम अदा कर सकते हैं जैसे कि मोबाइल का बिल, बिजली का बिल,यह एक तरफ से कैशलैस ट्रांजैक्शन है और आज के इस डिजिटल दौर में इसका उपयोग सभी जगह पर होने लगा है क्योंकि हर वक्त अपने पास बहुत अधिक नगद कैश रखना और उसे कहीं लाना और ले जाने का काम भी जोखिम भरा होता है। लेकिन मोबाइल टू पे के जरिए हम आसानी से कहीं और किसी जगह पर भी अपना नगद रकम भुगतान कर सकते हैं ,और इसे बहुत सारे शॉप या जनरल स्टोर्स मे देखा जाता है। इससे पहले गूगल ने पेटीएम को अपने प्ले स्टोर से हटा दिया था,लेकिन 24 घंटों के बाद ही गूगल ने इस ऐप को फिर से प्ले स्टोर मे शामिल कर लिया लेकिन पेटीएम को यह बात का पता लगने पर थोड़ा बुरा लगा शायद इसीलिए पेटीएम ने अपना खुद का ही मिनी एप स्टोर लॉन्च कर दिया है।यूजर्स को अब ऐप डाउनलोड करने के लिए एक और ऐप स्टोर का ऑप्शन मिल गया है।
इस एप्स स्टोर को भारत में छोटे डेवलपर्स और बिजनसमैन्स के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो कि लो-कॉस्ट और एचटीएमएल और जावास्क्रिप्ट का इस्तेमाल करके इज़ी-टू-बिल्ड ऐप को बनाते हैं। कंपनी के कहने के अनुसार है यह ऐप्प पेटीएम ऐप के अंदर ही खुलती हैं और इनकी लिस्टिंग भी बिल्कुल फ्री होगी पेटीएम भारत की मनी ट्रांसफर और भुगतान करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सबसे बड़ी ऐप है।
गूगल के मुताबिक भारत में ऑनलाइन कैसिनो और खेलों पर सट्टेबाजी कराने की इजाजत नहीं है, लेकिन गूगल के मना करने के बावजूद भी पेटीएम प्ले स्टोर की ऑनलाइन कैसीनो और खेलों पर सट्टेबाजी करा रही थी गूगल के उपाध्यक्ष सूजेन फ्रेन के कहने के अनुसार ऑनलाइन कैसीनो की अनुमति वे लोग नहीं देते हैं और ऐसे किसी भी ऐसे अनियमित जुआ ऐप्स का समर्थन नहीं करते हैं जो खेल सट्टेबाजी की सुविधा प्रदान करते हैं।पेटीएम और यूपीआई एप यह पेरेंट कंपनी One97 कम्युनिकेशन लिमिटेड के अंतर्गत काम करती है।


यह एक प्रीपेड और डिजिटल सेवा उपलब्ध कराती है जिसमें की सबसे पहले इसकी वॉलेट में पैसे डालने पड़ते हैं और बाद में इसी पैसों का उपयोग ऑनलाइन शॉपिंग में किया जाता है।इसके पेटीएम वॉलेट की शुरुआत 2014 में की गयीं। यह चाल्लीस लाख से अधिक कंपनियां भारत में है जिसमे कि यह सबसे बड़ी मोबाइल भुगतान सेवा उपलब्ध कराती है। यह सेवा उबर, बुक माय शो, और मेक माय ट्रिप जैसे इन्टरनेट कंपनियों के पार भुगतान करने का सबसे अच्छा तरीका बन गया। पेटीएम ने पेमेंट बैंक लिमिटेड नाम से एक नया बैंक वर्ष 2017 में लांच की। इसके अतर्गत अब सभी पेटीएम वॉलेट को पेटीएम बैंक में बदल दिया जायेगा और इनका केवाईसी वेरीफिकेशन भी होगा ।
पेटीएम के सभी यूजर्स पहले की तरह अपने खाते से पैसे का लेन-देन कर सकते हैं।गूगल ने कुछ समय के लिए प्ले स्टोर से ऐप को हटाया था लेकिन बाद में पेटीएम की सभी सुविधाएं को चालू कर हैं। इस समय गूगल द्वारा ऐप हटाने के बाद फिलहाल, पेटीएम की अन्य ऐप जैसे पेटीएम बिजनेस, पेटीएम मनी, पेटीएम मॉल और अन्य दूसरे प्रोडक्ट के ऐप सर्च में आ रहे हैं।
और इसकी वेबसाइट का नाम है पेटीएम. कॉम और इसका हेड क्वार्टर नोएडा उत्तर प्रदेश में है। इसकी वॉलेट में ठीक उसी तरह पैसे रखे जाते हैं जैसे कि पर्स में जिसके जरिए हम शॉपिंग कर सकते हैं ,मूवी देखने के लिए टिकट खरीद सकते हैं, यह एक निजी कंपनी है। जितने संस्थापक विजय शेखर शर्मा है। पेटीएम ऐप बनाया गया है ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड एप्पल और विंडोज के लिए बनाया गया है इस एप के द्वारा हम शॉपिंग कर सकते हैं, ट्रेन और हवाई जहाज के टिकट बुकिंग कर सकते हैं ,पेटीएम का मतलब है पे टू मोबाइल।इसे एंड्रॉयड और आईओएस एप्लीकेशन का सबसे लोकप्रिय एप्स के बीच में स्थान दिया गया है।
पेटीएम एक भारतीय इकॉमर्स शॉप ऐप है इसे 2010 में लाया गया इसके मालिक शुरुआती दौर मे मोबाइल और डीटीएच रिचार्ज का कार्य किया करते थे इसका मुख्यालय नोएडा है यह रिचार्ज और बिल भुगतान प्रदान करती है यह राज्य में सभी मोबाइल ऑपरेटर के साथ काम करता है। इसने कई राष्ट्रीय बैंक के क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, और नेट बैंकिंग भुगतान के साथ भागीदारी की थी। गूगल देश के डिजिटल इकोसिस्टम का गेटवे है इसलिए वह अपनी मनमानी नहीं कर सकता और ना ही अपने उन नियमों को बेवजह किसी पर थोप सकता है और गूगल को अपनी पावर का गलत उपयोग नहीं करना चाहिए और सभी को एक समान अवसर देना चाहिए ।गूगल अपने बिलिंग सिस्टम को अपनाने के लिए भारतीय डेवलपर्स पर दबाव नहीं दे सकता है ।
यह मिनी एप्प स्टोर के आने से अमेरिकी कंपनियों की हुकूमत कम होगी और भारत में रोजगार भी बढ़ेगा यह एक तरह से गूगल को चुनौती दे रहा है और इसमे बहुत सारी कंपनियां पार्टनरशिप में है जिसमें कि ओला, नेटमेडस, और डोमिनोस पिज़्ज़ा जैसी कंपनी भी एकजुट हुई है गूगल के 30% टैक्स के कारण स्टार्टअप के फाउंडर भी शामिल है। यह एक डिजिटल मोबाइल टू पे कंपनी है जो कि भारत के लोगों की मदद के लिए अपना एंड्राइड में मिनी एप्स स्टोर को लॉन्च की है इससे बहुत सारी कंपनियां जो कि उनका भी ऐप स्टोर है जैसे कि गूगल, एप्पल, और माइक्रोसॉफ्ट के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है और इस एप्स स्टोर के कारण उन्हें बिजनेस में मुनाफा भी काफी कम मिलेगा और सभी कंपनीयों में कंपटीशन भी बढ़ जाएगा। इस एप्स स्टोर के आने से बहुत सारी कंपनियों में अपने बिजनेस को लेकर भय पैदा होने लगा है। इस कंपनी में लगभग 300 से भी ज्यादा कंपनी ने पार्टनरशिप किया है अभी पेटीएम के मिनी ऐप्प स्टोर पर ऐप को लिस्ट कराने और डिसटीब्यूट करने के लिए कोई फीस नहीं ली जा रही है बाद में भले ही कोई चार्ज लगे इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। और यह मिनी एप्स स्टोर पेटीएम पर ही उपलब्ध होगी इसमे पच्चास से भी ज्यादा भारतीय स्टार्टअप के फाउंडर भी इसमे शामिल है। और इस कंपनी के प्रमुख व्यक्तियों में से एक है रोजर पे के हर्षिल।


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