सरकार संगठित क्षेत्रों के लोगों को प्रोविडेंट फंड में योगदान घटाने का विकल्प दे सकती है ताकि उनकी टेकहोम सैलरी( जो वेतन काटने के बाद हाथ में दिया जाता है) बढे। हालांकि पीएफ में कंपनी का योगदान 12% ही रहेगा इसमें कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा।

यह सारी बातें स्पेशल सिक्योरिटी कोड बिल 2019 में शामिल है । इसे पिछले सप्ताह केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी दे दी गई है इसमें ईपीएफओ आैर एएसआईसी को बरकरार रखने का फैसला लिया गया है माना जा रहा है की इससे कंजंपशन डिमांड बढ़ाने में कंपनियों को मदद मिलेगी । इस बिल को इसी सप्ताह संसद में पेश किया जाना है

बिल में यह प्रावधान है कि जिन कंपनी में कम से कम 10 मजदूर है उन्हें इएसआईसी के तहत अपने कर्मचारियों को लाभ देने होंगे और यह लाभ खतरनाक काम करने वाले वर्कर्स के लिए अनिवार्य होगा । यह भी बताया गया है कि जिन कंपनियों में 10 से भी कम श्रमिक काम करते हैं उन्हें इएसआईसी स्कीम के तहत स्वैच्छिक रूप से अपने कर्मचारियों को लाभ देना होगा। इसके साथ ही कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स pro-rata बेसिक पर ग्रेजुएटी पाने के हकदार होंगे ।

अब किसी भी कर्मचारी को एक कंपनी में ग्रेच्युटी के लिए 5 साल कार्य करने की आवश्यकता नहीं है इसके लिए 1 साल ही काफी होंगे इसकी समय सीमा को कम कर दिया गया है

इस बिल के जरिए सरकार ने देश में 50 करोड लोगों को सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में अपना कदम बढ़ाया है इसमें यह भी कहा गया है कि सभी कर्मचारियों को पेंशन, बीमारी, मातृत्व, मृत्यु और अपंगता से जुड़े वेलफेयर बेनिफिट्स भी दिए जाएंगे।