विश्व बैंक ने पहली जेंडर गैप रिपोर्ट 2006 में जारी की थी उस समय भारत की रैंकिंग 98वें थी। भारत में आर्थिक सक्रियता, स्वास्थ्य और जीवन स्तर के मामले में स्त्री- पुरुषों के बीच असमानता और ज्यादा बढ़ गए हैं ।

वर्ल्ड इकोनामिक फोरम द्वारा जारी रिपोर्ट में स्त्री- पुरुष और समानता में भारत की रैंकिंग 112वे स्थान पर पहुंच गई है । यह असमानता रैंकिंग पिछले वर्ष 108वें स्थान पर थी। लैंगिक समानता के मामले में आइसलैंड पहले नंबर पर बना हुआ है ।

आइसलैंड के बाद नॉर्वे, फिनलैंड और स्वीडन है वहीं पाकिस्तान 151वें स्थान पर है रिपोर्ट जारी करते हुए डब्लूइएफ ने बताया कि पहले यह माना जा रहा था कि लैंगिक असमानता खत्म होने में 108 वर्ष लग जाएंगे लेकिन जिस तरह से विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं का वर्चस्व बड़ा है।

इससे देखने के बाद यह कहा जा सकता है कि भेदभाव खत्म होने में 99.5 साल लगेंगे। हालांकि देश में शिक्षा, स्वास्थ और राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों में जो असमानता देखने को मिली है जो 2018 में थोड़ी बेहतर हुई थी ।

बता दे कि स्वास्थ्य एवं आर्थिक भागीदारी इन दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की सहभागिता के मामले में भारत सबसे नीचे स्थान पाने वाले 5 देशों में शामिल है।