हाल ही में नाबार्ड ने कर्नाटक में स्वच्छता “ साक्षरता अभियान शुरू किए हैं NABARD( National Bank For Agriculture and Rural Development) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक। यह ऐसा बैंक है जो गांव के लोगों को उनके विकास को बढ़ाने में और उनको आर्थिक रूप से उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए लोन उपलब्ध कराती हैं। इसका मुख्यालय भारत के मुंबई महाराष्ट्र में है और इसकी स्थापना 12 जुलाई,1982 मे हुई। यह हमारे देश भारत का एक बहुत बड़ा बैंक है
यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ संस्थागत मे भी ऋण उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। इसीलिए भारत सरकार के कहने पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस महत्वपूर्ण पहलू की जाँच के लिए कृषि और ग्रामीण विकास के लिए संस्थागत ऋण की व्यवस्थाओं की समीक्षा हेतु एक समिति(क्रैफीकार्ड) का गठन किया।इस योजना आयोग, भारत सरकार के पूर्व सदस्य श्री बी शिवरामन की अध्यक्षता में यह समिति 30 मार्च 1979 को की गई।
ग्रामीण विकास से जुड़े ऋण-संबंधी मुद्दों पर अखंडित रूप से ध्यान देने, उनको बलपूर्वक सही दिशा में ले जाने और उनपर सम्पूर्ण बल देने के लिए एक नई संस्थागत संरचना की आवश्यकता है. समिति की अनुशंसा थी कि अपनी तरह की एक विकास वित्तीय संस्था गठित की जाए जो इन आकांक्षाओं की पूरा कर सके और संसद ने 1981 के अधिनियम 61 के माध्यम से राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के गठन किया गया।
किसान क्रेडिट कार्ड नाबार्ड के द्वारा ही डिज़ाइन किया गया हैं। जिससे बहुत सारे किसानो को लाभ पंहुचा हैं। किसान क्रेडिट कार्ड की मदद से किसान बड़ी आसानी से बैंक से लोन ले सकते हैं।नाबार्ड का पुनर्वित्त राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास राज्य सहकारी बैंकों क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों बैंकों, वाणिज्यिक बैंकों (सीबीएस और आरबीआई अनुमोदित अन्य वित्तीय में संस्थानों के लिए उपलब्ध है। जबकि निवेश ऋण का अंतिम लाभार्थियों में व्यक्तियों, साझेदारी से संबंधित संस्थानों, कंपनियों, राज्य के स्वामित्व वाले निगमों, या सहकारी समितियों को शामिल किया जा सकता है, जबकि आम तौर पर उत्पादन ऋण व्यक्तियों को ही दिया जाता है।
बदलते आर्थिक विकास और परिवेश में बैंक के लिए व्यवसाय की नई संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से नाबार्ड ने वर्ष 2010 में रिपोजीशनिंग का कार्य शुरू किया. रिपोजीशनिंग करने के दौरान पहचाने गए नए व्यवसाय अवसरों के ऋण उत्पादों की ओर ऋण प्रवाह को निर्देशित करने के लिए एक नए विभाग का गठन किया गया, जिसका नाम व्यवसाय पहल विभाग है। व्यवसाय पहल विभाग निम्नलिखित तीन ऋण उत्पादों पर कार्य करता है –
नाबार्ड आधारभूत संरचना विकास सहायता (नीडा)
निम्नलिखित तीन चैनलों में ग्रामीण आधारभूत परियोजनाओं को निधिपोषण के लिए ‘नीडा’ एक ऋण व्यवस्था है :
ग्रामीण आधारभूत सुविधा विकास परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार और राज्य सरकार के स्वामित्व वाली संस्थाओं को सीधे निधिपोषण.
ग्रामीण क्षेत्रों में राज्य सरकार की संस्थाओं, सहकारी संस्थाओं, उत्पादक संगठनों, निगमों आदि द्वारा स्थापित विशेष प्रयोजन उपक्रमों(एसपीवी) के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से या विकसित निजी-सार्वजनिक भागीदारी वाली आधारभूत संरचना परियोजनाओं का वित्तपोषण
कंपनी और सहकारी संस्थाओं जैसी पंजीकृत संस्थाओं द्वारा संवर्धित ग्रामीण आधारभूत सुविधा परियोजनाओं का निधिपोषण करता है।
यह उन परियोजनाओं के लिए पूरा रिफाइनेंस का काम करता है जो ‘नेशनल वाटरशेड डेवलेपमेंट प्रोगाम’ और नेशनल मिशन ऑफ वेस्टलैंड डेवलेपमेंट के तहत संचालित हो रहे हैं।
यह “विकास वाहिनी” स्वयंसेवक कार्यक्रमों का भी समर्थन करता जो गरीब किसानों को ऋण और विकास गतिविधियों की पेशकश प्रदान करते हैं।
यह ग्रामीण वित्तपोषण तथा किसानों के कल्याण हेतु विकास को सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का निरीक्षण भी करता है। नाबार्ड, आरबीआई को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों के लिए लाइसेंस देने की भी सिफारिश करता है।
नाबार्ड उन विभिन्न संस्थाओं के कर्मचारियों को प्रशिक्षण और विकास सहायता प्रदान करता है जो ऋण वितरण से संबंधित होती हैं।यह पूरे देश में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए कार्यक्रम भी चलाता है।

आरंभ से अब तक नाबार्ड आधारभूत सुविधा विकास सहायता (नीडा) के अधीन निम्नलिखित विभिन्न क्षेत्रों की 66 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है , जैसे कि ऊर्जा पारेषण, नवीरकरणीय उर्जा , विद्युत वितरण , पुनरुद्धार सड़कें , और पुल भंडारण, मंडी प्रांगण का विकास सिंचाई , पेय जल स्वच्छता , और सहकारी बैंकों को सीधे पुनर्वित्त सहायता (डीआरए) वैद्यनाथन समिति के पुनरुत्थान पैकेज की सिफ़ारिशों को लागू करने से जि़ला मध्यवर्ती सहकारी बैंक(डीसीसीबी), राज्य सहकारी बैंकों (रास बैंकों) के अलावा दूसरे स्रोत से वित्तीय संसाधन जुटाने में सक्षम हो गए हैं।
इस संबंध में नाबार्ड ने जि़ला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (जिमस बैंकों) और राज्य सहकारी बैंकों को सीधे वित्तपोषण के लिए एक अल्पावधि बहुउद्देशीय ऋण उत्पाद तैयार किया है. सहकारी बैंकों को सीधे पुनर्वित्त सहायता के अधीन 31 मार्च 2018 को 35,188 करोड़ की जमा राशि स्वीकृति दी गई और 26,753 करोड़ का संचयी जमा राशि था ।
नाबार्ड की वार्षिक प्रगति इस प्रकार हैं वह
सीधे ऋण वितरण के अधीन निधिपोषण श्रेणियों में निम्नलिखित कार्य करता है।
तीन लाख लाख से अधिक (रियायती ब्याज सीमा के ऊपर) के फसली ऋण उपलब्ध कराता है
गैर कृषि क्षेत्र गतिविधियों के अधीन कार्यशील पूंजी ऋण देता है।
सबसे पहले कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से अधिप्राप्ति परिचालन का कार्य करता है और,चीनी भण्डार की गिरवी के समक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
कृषि उत्पादों की अधिप्राप्ति और विपणन तथा उर्वरकों कीटनाशकों आदि जैसी कृषि निवेश वस्तुओं की आपूर्ति में संलग्न राज्य विपणन सहकारी संघों और निगमों को अल्पावधि ऋण प्रदान करने के उद्देश्य से संघों को ऋण सुविधा (सीएफ़एफ़) की शुरूआत की गई।
संघों को ऋण सुविधा (सीएफ़एफ़) के अधीन कृषि और संबंधित कमोडिटी की अधिप्राप्ति,कृषि निवेश वस्तुओं की आपूर्ति, आपूर्ति शृंखला प्रबंधन (सप्लाई चेन मैनेजमेंट), मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडीशन) आदि के लिए कार्यशील पूंजी ऋण (18 महीने से कम की अवधि के लिए) हेतु ऋण सहायता उपलब्ध है कराता है। नाबार्ड के रंजना कुमार एक प्रसिद्ध भारतीय बैंकर हैं। कृषि और ग्रामीण विकास के लिए राष्ट्रीय बैंक (नाबार्ड) के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवानिवृत्ति के बाद रंजना कुमार केन्द्रीय सतर्कता आयोग में सतर्कता आयुक्त थी।19 मई 2020 को केंद्र सरकार ने गोविंदा राजुलु चिंताला को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक का नया अध्यक्ष नियुक्त किया। वर्तमान में वह नाबार्ड में चीफ जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। उनका कार्यकाल जुलाई 2020 तक रहेगा।