झारखंड में पहली बार टंगस्टन का भंडार मिला है बता दे कि गढ़वा के सलतुआ में इसके खान की पुष्टि की गई है। भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण (जीएसआई) ने यह जानकारी केंद्र सरकार को दी है जिसके बाद केंद्र सरकार की हरी झंडी के बाद भंडार का आकलन किया जाएगा। गलनांक क्षमता ज्यादा होने के कारण मिसाइल तथा दूसरे रक्षा के उपकरणों के निर्माण में टंगस्टन का उपयोग किया जाता है।

बता दें कि झारखंड में पहली बार एवं देश में दूसरी खान होगी । पहली खान राजस्थान के नागौर में स्थित है।टंगस्टन का भंडार मिलने के बाद टंगस्टन आधारित उद्योगों की संभावनाएं झारखंड में बढ़ गई है।