जेपीएससी की परीक्षा हमेशा विवादों में रही है राज्य गठन के बाद अब तक जेपीएससी केवल पांच परीक्षा ही ले पाया है। छठी जेपीएससी परीक्षा 4 सालों से विवादों में है। बता दें कि 2016 में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई थी जो अब तक पूरी नहीं हो पाई है जिस वजह से अभ्यर्थी शुरू से ही आंदोलन करते करते आए है। शुरू में जब यह परीक्षा ली गई उसके बाद पीटी का रिजल्ट जारी करने पर छात्रों ने आंदोलन किया क्योंकि विज्ञापन में लिखा गया था कि आरक्षण देय नहीं है बावजूद इसके आरक्षण के आधार पर रिजल्ट जारी किया गया आंदोलन के बाद इसे संशोधित कर फिर से दोबारा इसे जारी किया गया।

उसके बाद जारी रिजल्ट में 15 गुणा से 965 अभ्यर्थी अधिक है इसे लेकर अभ्यर्थियों ने आंदोलन किया इसके बाद फिर से संशोधित कर रिजल्ट निकाला गया । अब मेंस का रिजल्ट जारी होने के बाद भी सअभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं अभ्यर्थियों का कहना है कि छठी जेपीएससी की पूरी नियुक्ति प्रक्रिया ही गलत है इसमें आरक्षण का नियम पालन नहीं किया गया है और उनका कहना है इस परीक्षा में काफी त्रुटियां भी है इसलिए इसे रद्द कर देना चाहिए ।

अधिकारियों का कहना है कि सरकार उन्हें जो भी नियमावली के अनुसार नियुक्ति करने को कहती है उनके नियमानुसार ही कार्य करते हैं और वैसे ही परीक्षा लेते हैं बता दें कि इस परीक्षा में नियमावली में त्रुटि के कारण कई कमेटियों का गठन हुआ जिसके बाद इसमें कोई हल नहीं हुआ इसलिए अभ्यर्थियों का कहना है कि यह पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाए क्योंकि इससे अभ्यर्थीयों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और वे नौकरी की तलाश में दूसरी राज्य की ओर जाने के लिए विवश है।