देश में कोरोना से बचने के लिए टीके का निर्माण किया जा रहा है जिससे एंटीजन पैदा होंगे जो मानव के शरीर में प्रतिरोधी तंत्र में एंटीबॉडी का निर्माण करेंगे जिससे कि इस रोग से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होगी। हालांकि यह परीक्षण सबसे पहले एक चुहिया के ऊपर किया गया है।

पहले इसमें क्लीनिकल ट्रायल स्वयंसेवी छोटे समूह पर परीक्षण किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत करने में कितना सक्षम हो पाएगा और यह शरीर के लिए कितना सुरक्षित है ।
दूसरा इसमें कई इंसानों पर उसकी स्वेच्छा से परीक्षण किया जाएगा जिसमें कुछ लोग होंगे जो संक्रमण के दायरे में हैं ताकि अलग-अलग जगह से क्रम रहित वैक्सीन का प्रभाव के बारे में पता चल सके।

तीसरा इसमें बड़े स्तर का परीक्षण किया जाता है इससे यह पता चल सके कि प्राकृतिक रोगों की स्थिति में क्या प्रभाव डालता है अगर इसमें सफलता मिलती है तब इसे लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाता है।
आखिरी चरण में इसका व्यापक पैमाने पर निर्माण कराया जाता है और ध्यान रखा जाता है कि कहीं कोई दुष्प्रभाव सामने नहीं तो नहीं आ रहे हैं।