~*एमबीबीएस की पढ़ाई चीन, रूस एवं फिलिपिंस, बांग्लादेश से करना कितना safe है
Nitusingh abtaknews.live tak
एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए भारत के सबसे ज्यादा बच्चे चीन चले जाते हैं .इसके बाद दूसरी पसंद रूस के मेडिकल कॉलेज होते हैं .अगर देश में प्रैक्टिस का लाइसेंस हासिल कर पाने में देखा जाए तो चीन ,रूस से पढ़े बच्चों को कम लाइसेंस मिलता है. इसके मुकाबला बांग्लादेश और फिलीपींस के बच्चों का सक्सेस रेट ज्यादा है. आपको यह बता दें कि विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट्स एग्जामिनेशन एफएमजीe देना जरूरी होता है. वर्तमान में जो ताजा आंकड़ा आया है यह चौंकाने वाला है. बांग्लादेश फिलीपींस से लौटकर परीक्षा देने वाले कुल छात्र में 35% छात्र सफल होते हैं जबकि चीन रूस *से लौटे छात्र सिर्फ 20% ही* सफल होते हैं चीन में 2018 तक सिर्फ 45 मेडिकल कॉलेज ऐसे थे ,जहां पढ़ाई अंग्रेजी में होती थी. बाकी सारे कॉलेज में मैंडरिन ही मुख्य भाषा है .यह भी एक कारण हो सकता है कि भारत के स्टूडेंट भारत आने के बाद क्यों फेल कर जाते हैं. 2018 के बाद चीन ने सभी कॉलेज में अंग्रेजी को अनिवार्य कर दिया था, मगर माहौल में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है .वही बांग्लादेश की बात की जाए तो यहां की परिस्थिति भारत की जैसी है इसलिए यहां का डिजीज pattern भी भारत के जैसा होता है और छात्रों को प्रैक्टिकल में फायदा हो जाता है. 2020 के आंकड़े पर गौर किया जाए तो बांग्लादेश से पढ़कर आए 821 में से भारतीय परीक्षा में 294 .जबकि चीन से लगभग 13000 स्टूडेंट पढ़ कर लौटे और इसमें से सिर्फ 1600 स्टूडेंट ही पास कर पाए. नेपाल से 1400 स्टूडेंट पढ़ कर लौटे इसमें से 300 स्टूडेंट पास हुए. फिलीपींस से 3000 स्टूडेंट पढ़ कर लौटे इसमें से 1000 स्टूडेंट पास हुए. रूस से 4000 स्टूडेंट लौटे जिसमें से 600 स्टूडेंट पास हुए .अब सवाल यह उठता है कि भारत से एमबीबीएस करने के बजाय बाहर क्यों चले जाते हैं छात्र? बेहतर रैंक लाने के बाद भी अगर प्राइवेट कॉलेज में यहां एडमिशन नहीं होता है क्योंकि भारत के प्राइवेट कॉलेज में फीस ज्यादा है इसलिए यहां के स्टूडेंट कम फीस के कारण बाहर चले जाते हैं लेकिन बाहर के देश में विषम जलवायु परिस्थितियों है और वहां से मेडिकल कोर्स करके आने के बाद भारत में इनकी प्रैक्टिस चलनी मुश्किल हो जाती है क्योंकि वहां disease pattern वहां के जलवायु के हिसाब से और प्रैक्टिकल भी स्टूडेंट उसी प्रकार से करते हैं।