लिथियम का प्रयोग बैटरी में कैसे हो इसे लेकर शोध प्रस्तुत किया गया एनआईटी में शोध संस्थान पर कार्यशाला

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vinay singh jharkhandaajtak.in


राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर के धातुकर्म एवं पदार्थ अभियांत्रिकी विभाग के शोधार्थी अभिलाष मिश्रा ने अपने पीएच.डी. शोधकार्य का सफलतापूर्वक बचाव (PhD Defence) किया। उनके शोध का विषय था— “प्रयुक्त लिथियम-आयन बैटरियों से महत्वपूर्ण धातुओं की पुनर्प्राप्ति के लिए किफायती एवं टिकाऊ क्लोज्ड-लूप रीसाइक्लिंग प्रक्रिया का विकास।”

यह शोध डॉ. रीना साहू, एसोसिएट प्रोफेसर, धातुकर्म एवं पदार्थ अभियांत्रिकी विभाग, NIT जमशेदपुर के मार्गदर्शन में किया गया। प्रो. पी.के. झा ने ऑनलाइन बाह्य विशेषज्ञ के रूप में शोध-प्रस्तुति एवं बचाव में भाग लिया।

शोध-प्रबंध के बचाव के अवसर पर विभागीय शोध समिति (DRC) के सदस्यों एवं संकाय सदस्यों की उपस्थिति रही। इनमें डॉ. चंद्रशेखर चौधरी, विभागाध्यक्ष एवं SRC के अध्यक्ष, डॉ. रंजीत प्रसाद (पूर्व विभागाध्यक्ष), डॉ. रामा कृष्णा, डॉ. बिनय कुमार, डॉ. मोनालिसा मंडल, डॉ. रेणु कुमारी सहित अन्य संकाय सदस्य एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

यह शोध इलेक्ट्रिक वाहनों, पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ उत्पन्न होने वाली एक महत्वपूर्ण चुनौती—प्रयुक्त लिथियम-आयन बैटरियों का सुरक्षित एवं टिकाऊ प्रबंधन—को संबोधित करता है।

अभिलाष मिश्रा के शोध में प्रयुक्त एवं निष्प्रयोज्य बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और मैंगनीज जैसी मूल्यवान एवं महत्वपूर्ण धातुओं की पुनर्प्राप्ति के लिए एक प्रभावी रीसाइक्लिंग प्रक्रिया विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रस्तावित प्रक्रिया का उद्देश्य बैटरी अपशिष्ट को कच्चे माल के एक मूल्यवान द्वितीयक स्रोत में परिवर्तित करना तथा पारंपरिक खनन एवं अपशिष्ट निपटान से होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों को कम करना है।

शोध के प्रमुख परिणाम

शोध में एक ऐसे क्लोज्ड-लूप रीसाइक्लिंग मार्ग की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया है, जिसके माध्यम से पुनर्प्राप्त धातुओं को पुनः बैटरी निर्माण की आपूर्ति-श्रृंखला में शामिल किया जा सकता है। यह कार्य संसाधनों की बेहतर पुनर्प्राप्ति, अपशिष्ट में कमी तथा पारंपरिक धातु निष्कर्षण से जुड़े पर्यावरणीय एवं आर्थिक बोझ को कम करने की संभावनाओं को रेखांकित करता है।

यह अध्ययन सर्कुलर इकोनॉमी (परिपत्र अर्थव्यवस्था) की ओर बढ़ने तथा महत्वपूर्ण कच्चे माल की टिकाऊ आपूर्ति को मजबूत करने में बैटरी रीसाइक्लिंग की महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर करता है।

अपने शोध-कार्य की सफलता पर अभिलाष मिश्रा ने अपने माता-पिता, शोध निर्देशक डॉ. रीना साहू, NIT जमशेदपुर के निदेशक डॉ. गौतम सूत्रधार, ReCy Energy के निदेशक डॉ. मसूद खजेनूरी, डॉ. रणजीत प्रसाद, विभागाध्यक्ष डॉ. सी.एस. चौधरी तथा अपने शोध-कार्य के दौरान सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मोबाइल डॉ अभिलाष कुमार मिश्रा – 96434 47873

डॉ रणजीत प्रसाद
पुर्व प्राध्यापक
NIT Jamshedpur


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