रामनवमी क्यों मनाया जाता है?
रामनवमी के दिन हनुमान जी की पूजा क्यों होती है?
Abtaknews.live Nitusingh
रामनवमी चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी को मनाया जाता है क्योंकि भगवान राम का जन्म उस दिन हुआ था. भगवान राम के जन्मदिन के दिन ही उनके सबसे प्रिय भक्त हनुमान जी की भी पूजा की जाती है य.हां तक कि इस दिन महावीर जी का झंडा भी फहराया जाता है, ऐसा माना जाता है कि भगवान राम ने स्वयं हनुमान जी से एक बार कहा था कि मेरे जन्मदिन पर तुम्हारी पूजा होगी इसलिए आपने देखा होगा कि जहां कहीं भी भगवान राम का मंदिर होगा वहां भक्त के रूप में हनुमान जी का मंदिर जरूर होता है .लोग यह भी बताते हैं की हनुमान जी की पूजा करने वाले को राम भगवान बहुत प्रसंता की मुद्रा में देखते हैं. उन्हें अपने भक्तों का ख्याल होता है इसलिए राम नवमी के दिन ही हनुमान जी की पूजा होती है.
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आइए जानते हैं इसके इतिहास के बारे में
हनुमान जी को भी राम के जन्म का इंतजार था .भगवान राम के जन्म के पहले ही हनुमान जी इस धरती पर आ गए थे. राम की प्रतीक्षा में हनुमान जी ने काफी समय गुजारा था. एक कथा प्रसंग के दौरान लंका जाने के पहले समुद्र पर पुल बनाया जा रहा था. उस समय हनुमान भगवान राम जी के पास आने का मौका मिला, हनुमान जी ने देखा कि जिस पत्थर पर राम लिख कर डाला जा रहा था वह पत्थर नहीं डूबता था और इसे भगवान राम स्वयं फेंक देते थे वह डूब जाता था. भगवान राम को हनुमान जी ने कहा कि भगवान इसका क्या कारण हो सकता है उन्होंने कहा कि जिसे भगवान राम ही छोड़ देंगे वह तो डूब जाएगा.
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रामनवमी चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है .ऐसा कहते हैं कि दशरथ की सबसे बड़ी पत्नी कौशल्या की कोख से भगवान विष्णु ने अपना सातवां अवतार लिया था. इसी कारण से रामनवमी श्री राम के जन्म दिवस के उपलक्ष में मनाई जाती है. इस दिन भगवान को प्रसाद के रूप में पंचामृत ,श्रीखंड, खीर, हलवे का भोग लगाया जाता है .राम जी के पूजन में दूध और घी का अहम स्थान होता है.
एक और मान्यता के अनुसार महाभारत काल में अर्जुन और कर्ण के बीच जब युद्ध चल रहा था उस समय कर्ण तीर चलाता था तब अर्जुन का रथ थोड़ा सा पीछे जाता था लेकिन जब अर्जुन तीर चलाता तो karn का रथ बहुत पीछे हो जाता था. इसके बाद भी श्री कृष्ण कर्ण की तारीफ कर रहे थे .इसको देखकर अर्जुन को समझ नहीं आया तो उसने भगवान कृष्ण से पूछा कि वह ऐसा क्यों कर रहे हैं? तब उन्होंने बताया कि अर्जुन तुम्हारे रथ पर मैं बैठा हूं तथा रथ के ऊपर जो झंडा फहरा रहा है वह हनुमान जी की उपस्थिति का प्रतीक है .इसके बाद भी karn अपने तीर से तुम्हारे रथ को पीछे धकेल देता है. यही कारण है कि मैं उसकी तारीफ कर रहा हूं .हनुमान जी का ध्वज जहां भी होता है ,विजय का प्रतीक होता है. हनुमान जी कभी भी अपने भक्तों को हारने नहीं देते हैं.
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कैसे करनी चाहिए रामनवमी में पूजा
रामनवमी में पूजा करते समय पहले हनुमान की पूजा करनी चाहिए. इसके बाद ही भगवान राम पूजन स्वीकार करते हैं. अगर संभव हो तो भगवान राम को सीता फल चढ़े. यह उन्हें बहुत प्रिय होता है .रक्त कमल के पूजन में भगवान राम प्रसन्न होते हैं .जो कन्या सौभाग्य और सुंदर pati पाना चाहती है उन्हें सिंदूर चूड़ी और आभूषण से सीता जी का पूजन करना चाहिए.
भगवान राम के मृत्यु के समय हनुमान जी नागलोक क्यों चले गए
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राम भगवान के भक्तों के रूप में हमेशा हनुमान जी उनके पास रहते थे. इसके चलते ही मृत्यु के देवता कालदेव राम जी के पास आने से डरते थे .भगवान राम ने त्रेता युग में मनुष्य के रूप में जन्म लिया था, इसी कारण से उनकी भी मृत्यु होनी निश्चित थी. जब भगवान राम का पृथ्वी लोक पर आने का उद्देश्य पूरा हो गया तो उन्होंने पृथ्वीलोक को छोड़ने का निश्चय किया लेकिन कालदेव की सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि वह रामजी को तब तक अपने साथ लेकर नहीं जा सकते थे जब तक कि हनुमानजी वहां से नहीं हट जाएं .भगवान श्रीराम यह बात जानते थे यदि उनके जान जाने की बात हनुमान जी को पता चल गई तो पृथ्वी को उथल-पुथल कर देंगे इसलिए जिस दिन कालदेव को अयोध्या आना था उस दिन का देव ने हनुमान जी को मुख्य द्वार से दूर रखा था .उन्होंने इसके लिए एक तरीका निकाला उन्होंने अपनी अंगूठी महल के फर्श में आई दरार में डाल दी और हनुमान जी को से बाहर निकालने का आदेश दे दिया, जिसके बाद हनुमान जी ने छोटा आकार ले लिया. हनुमान जी अंदर जो नाग लोक की ओर जाती है वहां जाकर वहां आने का कारण पूछा. तब हनुमानजी ने बताया कि मेरे प्रभु श्री राम की अंगूठी पृथ्वी से होते हुए नाग लोक में आ गई है. इसके बाद vasukinath हनुमान जी को लेकर गए . जिसमें बहुत सी अंगूठी को दिखाया गया लेकिन उस अंगूठी के ढेर को देखते ही हनुमान जी परेशान हो गए और ढेर में प्रभु श्रीराम के अंगूठी खोजना ढेर में सुई खोजने के बराबर है. बाद में हनुमान जी को सारी स्थिति समझ में आ गई फिर उन्होंने कहा कि जब मैं अयोध्या जाऊंगा तो मैं अपने प्रभु श्रीराम से नहीं मिल पाऊंगा इसलिए मैं अब वहां जाना ही नहीं चाहता हूं.