झारखंड की नई सर्टिफिकेट वाली पॉलिसी # इस पॉलिसी से किसको फायदा किसको नुकसान

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झारखंड की नई सर्टिफिकेट वाली पॉलिसी ने सभी नौकरी को उलझा कर रख दिया है
Nitusingh abtaknews.live
झारखंड सरकार ने वर्ष 2021 में एक ऐसी नीति बनाई थी, जिसने यहां की सारी नियुक्ति को उलझा कर रख दिया है .यही कारण है कि डॉ रवि रंजन और डॉक्टर एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य सरकार की नीति की कोर्ट में आलोचना कर दिया और यह बोला कि अगर सरकार जवाब नहीं देती है और यह सोचती है उसकी वह नौकरी अपनी इच्छा अनुरूप लोगों को देती रहेगी तो यह सब कुछ अब नहीं चलेगा. सरकार को अंतिम रूप से 8 फरवरी को इसका जवाब देने को कहा है कि आपकी संशोधित नियमावली जो असंवैधानिक प्रतीत हो रही है ,ऐसा क्यों बनाया गया है सिर्फ कुछ लोगों पर यह रोक क्यों लगाया गया कि वह बाहर जाकर नहीं पढ़ेंगे .उन्हें जबरदस्ती झारखंड में ही पढ़ना होगा. ऐसा नियम आप क्यों बना रहे हैं? आपका यह नियम समझ से परे की आरक्षित वर्ग के बच्चे किसी स्कूल में और भारत के किसी राज्य और शहर में तो पढ़ सकते लेकिन जनरल कास्ट का बच्चा कहीं पढ़ने नहीं जा सकता. ऐसा कानून बनाने के पीछे आपकी मंशा क्या है? कोर्ट की इतनी कड़ी टिप्पणी से झारखंड सरकार के होश उड़ गए? अब सबसे बड़ी दिक्कत यह होगी कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग जो कई वैकेंसी निकल चुकी है यह सारे की नियुक्ति पर संकट खड़ा हो जाएगा. खंडपीठ ने सरकार से यह भी पूछा कि आप विज्ञापन जारी करने के पहले ही योजना बना लेते हैं कि नौकरी देना ही नहीं है और अब जवाब देने में देरी क्यों कर रहे हैं. वही कोर्ट ने यह भी जानना चाहा 14 स्थानीय भाषा में से हिंदी अंग्रेजी को बाहर करने के बाद उर्दू बंगला और उड़िया को क्यों अंदर लाया गया .इसके पीछे क्या मंशा है? जाहिर सी चीज है कि झारखंड में सरकार किसी की एक इस प्रकार की नियम बना दी जाती है जिससे सारी नौकरी उलझ कर रह जाए


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