स्कूल कोचिंग और कॉलेज को खोलने का समर्थन किया वर्ल्ड बैंक ने
Nitusingh abtaknews.live
कोरोनावायरस के कारण संक्रमण के नाम पर स्कूल को बंद करना क्या सही है? वर्ल्ड बैंक ने इसे अतार्किक कहा है. संक्रमण के नई लहर के दौरान भी ऐसा अंतिम उपाय के रूप में उठाया जाने वाला कदम होना चाहिए .वर्ल्ड बैंक के शिक्षा निदेशक Jemima Saavedra ने कहा है कि स्कूल को खोलने से संक्रमण में तेजी आएगी ,इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है .कई देश में स्कूल बंद होने के बाद भी कोरोनावायरस आया .उन्होंने कोरोनावायरस से शिक्षा पर पड़ने वाले असर पर अध्ययन कर रही है. स्कूल खोलने के लिए सभी बच्चों को टीका लगाने का तर्क भी गैर जिम्मेदाराना एवं अव्यवहारिक बताया .उन्होंने कहा कि एक ही समय पर रेस्तरां होटल बार और शॉपिंग मॉल्स खुले हुए हैं और स्कूल को बंद किया गया है .वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट के अनुसार स्कूल बंद रखने से बच्चों में संक्रमण का जोखिम बहुत कम होगा लेकिन इसकी तुलना में बच्चों को शिक्षा को लेकर होने वाला नुकसान अधिक होगा. कोरोनावायरस के दौरान दुनिया भर में प्रतिबंध का दौर शुरू हुआ. सबसे अधिक नुकसान इसमें शिक्षा व्यवस्था को हुआ है. वर्ल्ड बैंक ने अपने अध्ययन में बताया है कि पिछले 2 साल के दौरान भारत में स्कूल बंद होने से 10 साल तक के 70% बच्चे के सीखने की क्षमता पर असर पड़ा है. इसे लर्निंग पॉवर्टी कहा जाता है. इसमें 10 साल तक के बच्चों को सामान्य से वाक्यों को पढ़ने और सीखने में मुश्किल आती है. स्कूल बंद होने के क्रम से बच्चों की पढ़ाई पर बहुत अधिक असर पड़ता है. वर्ल्ड बैंक के एक अनुमान के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था को इससे आने वाले समय में लगभग ₹30 crore का घाटा होने की आशंका है. यूनिसेफ ने दिसंबर 2021 में जारी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में लगभग 1 सौ से अधिक देशों में स्कूल फिर खुल चुके हैं. अमेरिका ब्रिटेन कनाडा और जापान में हुए शोध के अनुसार स्कूल खोलने में बहुत कम असर पड़ता है.