मंदिर में जमीन का मालिक देवी देवता है, सुप्रीम कोर्ट ने अपने नए फैसले में कहा पुजारी को मालिक नहीं माना जा सकता
Nitusingh abtaknews.live
सुप्रीम कोर्ट में एक मामला चल रहा था जिसमें या देखा जाना था कि मंदिर के जमीन का मालिक क्या पुजारी हो सकता है लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि किसी भी मंदिर का मालिक देवी देवता को ही माना जाएगा पुजारी केवल मंदिर के संपत्ति का प्रबंधन ही कर सकता है देवता एक न्यायिक व्यक्ति होने के कारण भूमि का स्वामी हो सकते हैं. भूमि पर देवता का ही कब्जा होता है. उनके कामकाज को देखने के लिए पुजारी नियुक्त किए जाते हैं। संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए भी कहा कि सरकारी भूमि का एक साधारण किरायदार नहीं है उसे देवस्थान से संबंधित भूमि के प्रबंधन के उद्देश्य रेखा जाता है। यदि पुजारी अपना कार्य करने में जैसे प्रार्थना करने के लिए भूमि का प्रबंधन करने के लिए काम नहीं कर पा रहा है तो उसे बदला जा सकता है इसलिए उसे मंदिर की जमीन का मालिक नहीं माना जाएगा ।
क्या है मामला- मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई चल रही है इस आदेश में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 1959 के राजस्व कोर्ट के तहत परिपत्र को रद्द कर दिया था ।जिसमें पुजारी के नाम राजस्व रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया गया था ताकि मंदिर की संपत्ति को पुजारी द्वारा अनाधिकृत विक्री से बचाया जा सके