नियमानुसार सभी नियम पूरी होने के बाद भी शहर के लोगों का पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है इसका कारण यह है कि शहर में 20 लोग गहराई से जानने वाले नहीं है ।

खतियान के अभाव में नया नियम बनाया गया जिसके अंतर्गत जमशेदपुर में रहने वाले लोगो के पास जमीन का खातियान नहीं है तो खातियान वह होता है जिसमें संबंधित व्यक्ति वहां रखने और उसमें जाति का उल्लेख होता है।

जमशेदपुर में रहने वाले ज्यादातर लोग टाटा लीज या अवैध जमीन पर बसे हैं इसलिए उनके पास खातियान नहीं है इस वजह से सरकार ने उनके लिए 24 जुलाई 2019 से पहचान के लिए स्थानीय जांच का एक नया तरीका लागू किया है जिसमें जिन लोगों का प्रमाण पत्र बनना है ।

उन्हें कम से कम 20 लोगों की गवाह चाहिए जिसमें 10 गवाहों की उम्र आवेदक की उम्र या कम से कम 20 वर्ष होनी चाहिए एवं 10 लोग ऐसे जो उनके पिता, दादा के उम्र के होने चाहिए या नहीं तो आवेदक का संबंध जाति समाज के अध्यक्ष की अनुशंसा जमा करनी है यह काम नहीं हो पाया तो उनका प्रमाण पत्र नहीं बनाया जा सकता है।