मुकदमे दायर करने की समयसीमा को विस्तारित करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि यह पुलिस जांच पर भी लागू होंगे या नहीं । बता दें कि 60 दिन या 90 दिन के अंदर जांच पूरी करने या आरोपपत्र दायर नहीं होने पर अभियुक्त को सीआरपीसी की धारा 167 (2) के तहत डिफॉल्ट जमानत का अधिकार होगा। गौरतलब है कि कोविड-19 के कारण लॉक डाउन के चलते 23 मार्च को सभी मामले के समय सीमा के प्रतिबंध को विस्तारित कर दिया गया था।

परंतु अब सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला एक विशेष अनुमति याचिका में अपने हाथ में ले लिया है जो मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई है उच्च न्यायालय 11 मई को आदेश में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का 23 मार्च का आदेश पुलिस जांच पर भी लागू किया जाएग।
जिसके बाद इस कोर्ट के विपरीत दूसरी बेंच में इसके विपरीत आदेश जारी किया था जिसमें अभियुक्त को जमानत देने का आदेश दिया गया था।
आदेश में यह कहा गया था कि पूरी जांच पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत ज्यादा समय लेने का लाभ नहीं ले सकती मई को कहा गया था कि पुलिस को यह अगर करने दिया जाता है तो यह अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा